शनिवार, 23 अक्तूबर 2010

छत्तीसगढ में सहकारिता के माध्यम से चमका किसानों का भाग्य

दैनिक " हाइवे  चैनल " रायपुर  ,23.10.2010


दैनिक " स्वदेश  " रायपुर  ,24.10.2010

दैनिक " समवेत शिखर  " रायपुर  ,24.10.2010


दैनिक " अग्रदूत   " रायपुर  ,24.10.2010


दैनिक "तरूण छत्तीसगढ़   " रायपुर  ,24.10.2010




दैनिक " पेज -9  " रायपुर  ,24.10.2010

दैनिक "वीर अर्जुन "  नईदिल्ली ,24.10.2010

दैनिक "नेशनल लुक "  रायपुर , 26.10.2010



मासिक पत्रिका "ग्राम संस्कृति " नवम्बर 2010



 विस्तृत   आलेख   ग्राम चौपाल  में पढ़े .

6 टिप्‍पणियां:

  1. सहकारिता शुभ है। यह ग्लोबल विलेज की अवधारणा का लघुतम स्वरूप है।

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  2. सहकारिता एक बहुत अच्छी अवधारणा है, जब तक कि उसमें स्वार्थी तत्व न आयें और ईमानदारी से काम होता रहे. आज कार के लिये लोन आसानी से मिल जाता है लेकिन गरीब किसान को पचीस-पचास हजार का कर्ज नहीं मिल पाता. किसान को सस्ता-सुलभ और कम ब्याज का कर्ज, भंडारण की सुविधा, उपज मंडी तक पहुंचाने के लिये गांवों का मंडियों से बढ़िया सड़क सम्पर्क तथा अवैध उगाही से मुक्ति मिल जाये तो एक बार फिर से किसान अपना खोया गौरव प्राप्त कर सकेगा और आत्महत्या जैसी विवश मृत्यु से निजात पा सकेगा... अपनी प्रोफाइल में कुछ तो लिखिये, जनाब.... शब्द पुष्टिकरण हटा देंगे तो बहुत अच्छा लगेगा...

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  3. दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं !

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  4. सराहनीय ब्लॉग ...आपको धन्यवाद

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