बुधवार, 4 मार्च 2015
मंगलवार, 23 सितंबर 2014
भारतीय संस्कृति का मौलिक चित्रण है एकात्म मानववाद
असाधारण व्यक्तित्व के धनी पं. दीनदयाल उपाध्याय एक महान देशभक्त, कुशल संगठनकर्ता, मौलिक विचारक, दूरदर्शी, राजनीतिज्ञ ,पत्रकार और प्रबुद्ध साहित्यकार थे. आजादी के बाद देश की दशा पर उन्होंने गहन चिंतन किया तथा पूंजीवाद, साम्यवाद और समाजवाद के मुकाबले एकात्म मानववाद का दर्शन प्रस्तुत किया. एकात्म मानववाद में भारतीय संस्कृति का मौलिक चित्रण है , भारतीय संस्कृति का दृष्टिकोण एकात्मवादी होने के कारण ही वह सम्पूर्ण जीवन तथा सम्पूर्ण सृष्टि का संकलित विचार करती है. टुकड़ों-टुकड़ों में विचार करना विशेषज्ञों की दृष्टि से उचित हो सकता है, परंतु व्यावहारिक दृष्टि से उपयुक्त नहीं. अग्रेजी शासन की दासता से मुक्ति पाने के बाद हमारी प्राथमिकता आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्वतंत्रता होनी चाहिए थी लेकिन दुर्भाग्य से देशवाशियों को इसकी आत्मानुभूति नहीं हुई. संस्कृति हमारे देश की आत्मा है तथा वह सदैव गतिमान रहती है. इसकी सार्थकता तभी है जब देश की जनता को उसकी आत्मानुभूति हो. देश को किस मार्ग पर चलना चाहिए इस पर चिंतकों में मतभेद था कुछ अर्थवादी ,कुछ राजनीतिवादी तथा कुछ मतवादी दृष्टिकोण के थे , इनमें से अलग हट कर पं. दीनदयाल उपाध्याय ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के सिद्धांत पर जोर दिया उन्होनें कहा कि संस्कृति-प्रधान जीवन की विशेषता यह है कि इसमें जीवन के मौलिक तत्वों पर तो जोर दिया जाता है पर शेष बाह्य बातों के संबंध में प्रत्येक को स्वतंत्रता रहती है. इसके अनुसार व्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रत्येक क्षेत्र में विकास होता है. संस्कृति किसी काल विशेष अथवा व्यक्ति विशेष के बन्धन से जकड़ी हुई नहीं है, अपितु यह तो स्वतंत्र एवं विकासशील जीवन की मौलिक प्रवृत्ति है. इस संस्कृति को ही हमारे देश में धर्म कहा गया है. जब हम कहतें है कि भारतवर्ष धर्म-प्रधान देश है तो इसका अर्थ मज़हब, मत या रिलीजन नहीं, अपितु यह संस्कृति ही है.
अंग्रेजी शासन काल में सबका लक्ष्य एक था ”स्वराज” लाना लेकिन स्वराज के बाद हमारा रूप क्या होगा ? हम किस दिशा में आगे बढे़गे ? इस बात पर ज्यादा विचार ही नहीं हुआ. पं. दीनदयाल उपाध्याय ने 1964 में कहा था कि हमें ”स्व” का विचार करने की आवश्यकता है. बिना उसके ”स्वराज्य” का कोई अर्थ नहीं. स्वतन्त्रता हमारे विकास और सुख का साधन नहीं बन सकती। जब तक हमें अपनी असलियत का पता नहीं तब तक हमें अपनी शक्तियों का ज्ञान नहीं हो सकता और न उनका विकास ही संभव है. परतंत्रता में समाज का ”स्व”दब जाता है. इसीलिए राष्ट्र स्वराज्य की कामना करता हैं जिससे वे अपनी प्रकृति और गुणधर्म के अनुसार प्रयत्न करते हुए सुख की अनुभूति कर सकें. प्रकृति बलवती होती है, उसके प्रतिकुल काम करने से अथवा उसकी ओर दुर्लक्ष्य करने से नाना प्रकार के कष्ट होते हैं. प्रकृति का उन्नयन कर उसे संस्कृति बनाया जा सकता है, पर उसकी अवहेलना नहीं की जा सकती. आधुनिक मनोविज्ञान बताता है कि किस प्रकार मानव-प्रकृति एवं भावों की अवहेलना से व्यक्ति के जीवन में अनेक रोग पैदा हो जाते हैं, ऐसा व्यक्ति प्रायः उदासीन एवं अनमना रहता है. उसकी कर्म-शक्ति या तो क्षीण हो जाती है अथवा विकृत होकर वि-पथगामिनी बन जाती है. व्यक्ति के समान राष्ट्र भी प्रकृति के प्रतिकूल चलने पर अनेक प्रकार की व्याधियों का शिकार हो जाता है, आज भारत की अनेक समस्याओं का मूल कारण यही है.
पं. दीनदयाल उपाध्याय ने मानव शरीर को आधार बना कर राष्ट्र के समग्र विकास की परिकल्पना की. उन्होनें कहा कि मानव के चार प्रत्यय है पहला मानव का शरीर , दूसरा मानव का मन , तीसरा मानव की बुद्धि और चौथा मानव की आत्मा. ये चारोँ पुष्ट होंगें तभी मानव का समग्र विकास माना जायेगा. इनमें से किसी एक में थोड़ी भी गड़बड़ है तो मनुष्य का विकास अधूरा है. जैसे यदि किसी के शरीर में कष्ट हो और उसे 56 भोग दिया जाय तो उसकी खाने में रूचि नहीं होगी. यदि कोई व्यक्ति बहुत ही स्वादिस्ट भोजन कर रहा है उसी समय यदि कोई अप्रिय समाचार मिल जाय तो उसका मन खिन्न हो जायेगा. भोजन तो समाचार मिलने के पूर्व जैसा स्वादिस्ट था अब भी वैसा ही स्वादिस्ट है लेकिन अप्रिय समाचार से व्यक्ति का मन खिन्न हो गया इसीलिये उसके लिए भोजन क्लिष्ट हो गया. यानी भोजन करते वक्त “आत्मा” को जो सुख मिल रहा था वह मन के दुखी होने से समाप्त हो गया. पं. दीनदयाल जी ने कहा कि मनुष्य का शरीर,मन, बुद्धि और आत्मा ये चारोँ ठीक रहेंगे तभी मनुष्य को चरम सुख और वैभव की प्राप्ति हो सकती है.
जब किसी मनुष्य के शरीर के किसी अंग में कांटा चुभता है तो मन को कष्ट होता है , बुद्धि हाथ को कांटा निकालने के लिए निर्देशित करती है और हाथ चुभे हुए स्थान पर पल भर में पहुँच जाता है और कांटें को निकालने की चेष्टा करता है. यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. सामान्यतः मनुष्य शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा इन चारोँ की चिंता करता है. मानव की इसी स्वाभाविक प्रवृति को पं. दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद की संज्ञा दी. उन्होंने मनुष्य की इस प्रवृति को राष्ट्र के परिपेक्ष्य प्रतिपादित करते हुए कहा कि राष्ट्र की स्वाभाविक प्रवृति ही उसकी संस्कृति है. उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा को समझना है तो उसे राजनीति अथवा अर्थ-नीति के चश्मे से न देखकर सांस्कृतिक दृष्टिकोण से ही देखना होगा. भारतीयता की अभिव्यक्ति राजनीति के द्वारा न होकर उसकी संस्कृति के द्वारा ही होगी. विश्व को यदि हम कुछ सिखा सकते हैं तो उसे अपनी सांस्कृतिक सहिष्णुता एवं कर्त्तव्य-प्रधान जीवन की भावना की ही शिक्षा दे सकते हैं. राजनीति अथवा अर्थनीति शायद हमको उनसे ही उल्टे कुछ सीखना पड़े. पं. उपाध्याय ने कहा कि अर्थ, काम और मोक्ष के विपरीत धर्म की प्रमुख भावना ने भोग के स्थान पर त्याग, अधिकार के स्थान पर कर्त्तव्य तथा संकुचित असहिष्णुता के स्थान पर विशाल एकात्मता प्रकट की है. इसी भावना के साथ हम विश्व में गौरव के साथ खड़े हो सकते हैं.
लेखक - अशोक बजाज , पूर्व अध्यक्ष जिला पंचायत रायपुर
शुक्रवार, 22 अगस्त 2014
तरंगों को किसी देश की सीमा से नहीं बांधा जा सकता
श्रोता दिवस पर अखिल भारतीय श्रोता सम्मलेन व प्रदर्शनी का आयोजन
(LISTENERS DAY , 20 August)
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| सम्मलेन को संबोधित करते हुए |
रेडियो श्रोता दिवस के अवसर पर भाटापारा में 20 अगस्त को अखिल भारतीय श्रोता सम्मलेन एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. यह सम्मलेन भाटापारा के अग्रसेन भवन में हुआ. जिसमें देश भर के लगभग 300 श्रोताओं ने भाग लिया. कार्यक्रम में पुराने फिल्मों के एलबम, प्राचीन वाद्य यंत्रो, देश भर में पाए जाने वाले पत्थरों, पुराने सिक्कों एवं पिछले कार्यक्रमों के तस्वीरों की नयनाभिराम प्रदर्शनी भी लगाई गई. गीत- संगीत का भी रोचक कार्यक्रम हुआ तथा पुराने फ़िल्मी गीतों के संग्रह की सी.डी. का विमोचन किया गया. कार्यक्रम के दौरान रायपुर से पधारी श्रीमती आशा जैन ने सर्वाईकल कैंसर एवं आहार विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रतिभागियों को प्रदान की.
आयोजक मंडल ने छत्तीसगढ़ लिसनर्स क्लब के संयोजक के नाते मुझे मुख्य अतिथि बनाया था, जबकि अध्यक्षता विधायक श्री शिवरतन शर्मा ने की. कार्यक्रम में विविध भारती मुंबई के एनाउन्सर श्री कमल शर्मा एवं श्री राजेंद्र त्रिपाठी के अलावा आकाशवाणी बिलासपुर तथा अम्बीकापुर के एनाउन्सर व कम्पीयर विशेष रूप से उपस्थित थे.
मुख्य अतिथि के नाते अंत में मुझे अंत में बोलने का अवसर दिया गया. मैनें श्रोता बंधुओं एवं बहनों से कहा कि संचार क्रांति के इस युग में रेडियो की महत्ता आज भी कायम है विशेषकर भारत जैसे विकासशील देश में रेडियो आज भी प्रासंगिक है. मैनें विभिन्न देशों के रेडियो स्टेशनों द्वारा चलाये जा रहे हिन्दी सर्विस का जिक्र करते हुए कहा कि लोग भले ही अपने अपने देश की सीमाओं से बंधें हो लेकिन तरंगों को किसी देश की सीमा से नहीं बांधा जा सकता. आज दुनिया में संचार के अनेक साधन विकसित हो चुके है परन्तु उसमें फूहड़ता व अश्लीलता ज्यादा होती है, यही वजह है कि आज समाज में नैतिक मूल्यों में गिरावट आ रही है. टेलीविजन के कार्यक्रमों को हम भले ही परिवार सहित बैठकर नहीं देख सकते हो लेकिन रेडियों के कार्यक्रमों को हम परिवार सहित बैठकर सुन सकते है. यहाँ पर भाटापारा के श्रोताओं की प्रशंसा करना आवश्यक था क्योंकि यहाँ के श्रोताओं की सजगता, सक्रियता व जागरुकता के कारण इस शहर की कीर्ति चारों तरफ फैली हुई है.
उल्लेखनीय तथ्य यह है कि छत्तीसगढ़ से प्रारंभ हुई श्रोता दिवस मनाने की परंपरा अब पूरे देश में शुरु हो चुकी है. लिसनर्स-डे मनाने की परंपरा की शुरुवात वर्ष 2008 में छत्तीसगढ़ के श्रोताओं ने की थी तथा देश भर के श्रोताओ से 20 अगस्त को यह पर्व मनाने की अपील की थी. फलस्वरूप यह पर्व अब देश के अधिकांश हिस्सों में मनाया जा रहा है. ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से श्रोताओं में जाग्रति आ रही है.
सम्मलेन में आकाशवाणी के एनाउन्सर श्रीमती संज्ञा टंडन, श्री हरिश्चन्द्र वाद्यकार, श्री महेंद्र साहू, लौकेश गुप्त, श्री आर. चिपरे के अलावा रेडियो के वरिष्ठ श्रोता श्री परसराम साहू, श्री हरमिंदर सिंह चावला, श्री बचकामल, श्री रतन जैन, श्री कमलकांत गुप्ता, श्री सुरेश सरवैय्या, श्री विनोद वंडलकर, श्री कमल थवानी, श्री सोहन जोशी, श्री प्रदीप जैन, श्री खरारी राम देवांगन, श्री सुनील मिश्रा, श्री माधव मिरी, श्री रेखचंद मल, श्री आर.सी.कामड़े, श्री ईश्वरीसाहू, श्री दिनेश वर्मा, श्री धरमदास वाधवानी, श्री पी.एस. वर्मा, श्री दुर्गाप्रसाद साहू, श्री प्रदीप चन्द्र, श्री भागवत वर्मा, श्री संतोष वैष्णव, श्री मोतीलाल यादव, श्री मोहन देवांगन, श्री अनिल ताम्रकार कटनी, श्री अखिलेश तिवारी जबलपुर, श्री महेंद्र सिंह कुरुक्षेत्र हरियाणा, श्री प्रकाश हिन्गोले नागपुर, श्री हनुमान दास साहू यवतमाल, श्री रामजी दुबे पश्चिम बंगाल, श्री चंद्रेश गौहर इंदौर, श्री बलवंत वर्मा प्रमिलागंज मध्यप्रदेश प्रमुख रूप से उपस्थित थे.
सम्मलेन की झलकियाँ
सम्मलेन की झलकियाँ
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| संबोधन |
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| सी.डी. का विमोचन |
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| दीप प्रज्ज्वलन |
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| स्वागत |
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| पत्थरों की प्रदर्शनी |
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| फोटो व प्राचीन वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनी |
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| प्राचीन वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनी |
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| फोटो प्रदर्शनी |
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| पुराने फिल्मों के पोस्टर |
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| श्रोता गण |
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| श्रोता गण |
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| श्रोता गण |
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| श्रोता गण |
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| श्रोता गण |
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| श्रोता गण |
कार्यक्रम से संबंधित प्रकाशित समाचारों की कतरनें
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| दैनिक भास्कर रायपुर, 22.08.2014 |
| दैनिक देशबंधु रायपुर, 22.08.2014 |
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| दैनिक हरिभूमि रायपुर, 22.08.2014 |
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| दैनिक नईदुनिया रायपुर, 22.08.2014 |
| दैनिक तरुण छत्तीसगढ़ रायपुर, 22.08.2014 |
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| दैनिक नवभारत रायपुर, 21.08.2014 |
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| आलेख / दैनिक नवभारत रायपुर, 21.08.2014 |
रविवार, 16 मार्च 2014
मंगलवार, 3 दिसंबर 2013
मनमीत जो घाव लगाये, उसे कौन मिटाये
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए दो चरणों में मतदान हो चुका है. पहले चरण में बस्तर संभाग के 12 क्षेत्रों एवं राजनांदगांव जिले के 6 क्षेत्रों कुल 18 सीटों के लिए 11 नवंबर को तथा शेष 72 क्षेत्रों के लिए 19 नवंबर को मतदान हुआ है. मतगणना 8 दिसंबर को होगी, मतदान और मतगणना के बीच लंबा अंतराल है. अतः परिणाम आने में अभी वक्त है. यही वजह है कि इन दिनों घात - प्रतिघात, भीतरघात - खुलाघात जैसी बातें सुर्खियाँ बन रही है. आश्चर्य की बात तो यह है कि कांग्रेस के नेता इन तमाम परिस्थितियों के बाद भी सत्ता में वापसी का सपना देख रहें है , मुख्यमंत्री कौन होगा ? विधायक दल के अन्दर का होगा अथवा बाहर का होगा ? रायपुर में तय होगा कि दिल्ली में तय होगा आदि आदि . यानी सूत न कपास जुलाहों में लट्ठा-लट्ठी.
खैर भीतरघात हो या खुलाघात ये बहुत बुरी चीज है. विधानसभा, लोकसभा ही नहीं पंचायतों एवं नगरीय निकायों के चुनाव में भी यह बीमारी घुस गई है. मै स्वयं 1998 के विधान सभा चुनाव में खुलाघात और भीतरघात का स्वाद चख चुका हूँ , तब मैंने भारतीय जनता पार्टी की टिकिट पर अभनपुर विधानसभा से चुनाव लड़ा था और बागी उम्मीदवार तथा भीतरघात के चलते लगभग 7000 मतों से हार गया था लेकिन 15 वर्षों से मैंने इसका जिक्र तक नहीं किया. मैंने सभी भीतरघातियों को धीरे- धीरे मुख्यधारा में लाकर उन्हें प्रायश्चित करने का अवसर दिया. आवश्यकता पड़ने पर उनकी मदद भी की. यह अलग बात है कि उस आघात का दुष्परिणाम मै आज तक भुगत रहा हूँ ---किशोर दा का गाया फिल्म अमर प्रेम का यह गीत -
हमसे मत पूछो कैसे, मंदिर टूटा सपनों का,
लोगों की बात नहीं है, ये किस्सा है अपनों का,
कोई दुश्मन ठेस लगाये, तो मीत जिया बहलाये,
मनमीत जो घाव लगाये, उसे कौन मिटाये.
चिंगारी कोई भड़के, तो सावन उसे बुझाये
सावन जो अगन लगाये, उसे कौन बुझाये,
रविवार, 28 जुलाई 2013
"कश्मीर का सच" कितना सच और कितना झूठ
एक
राष्ट्रीय न्यूज चैनल द्वारा दिखाया जा रहा "कश्मीर का सच" पता नहीं यह
कितना सच और कितना झूठ है ? उस पीढ़ी के लोग तो अब रहे नहीं जो इस तथाकथित
"सच" की समीक्षा करते, पर इतिहास तो यही कहता है कि जम्मू-कश्मीर का भविष्य
पंडित नेहरू, लार्ड माउंटबेटन और शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की दोस्ती की भेंट
चढ़ गया. अगर सरदार पटेल को पूरी छूट मिली होती तो कश्मीर समस्या उसी समय
समाप्त हो चुकी होती , लेकिन पंडित नेहरू का अब्दुल्ला प्रेम इसमें आड़े आ
गया. इस न्यूज चैनल ने कश्मीर रियासत को भारत में विलय में राष्ट्रीय स्वयं
सेवक संघ के तत्कालीन सरसंघचालक श्री माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर जी की
भूमिका का अपने रपट में कहीं उल्लेख ही नहीं किया जबकि उन्होंने ही कश्मीर
के भारत में विलय में मुख्य भूमिका अदा की थी. उक्त रपट में केवल पंडित
नेहरू को ही महिमा मंडित करने का प्रयास किया गया. रपट में यह जानकारी भी
छुपाई गई कि जब भारतीय सेना ने कश्मीर के दो तिहाई हिस्से से पाकिस्तानी
समर्थकों को खदेड़ दिया था तो पं. नेहरू ने सीज फायर की घोषणा कर भारतीय
सेना को वापस लौटने का आदेश किसके इशारे पर दिया तथा पं. नेहरू ने
किसके इशारे पर कश्मीर में धारा 370 लगाई ? बहरहाल पूरे रपट में लार्ड
माउंटबेटन को भारत का महान राष्ट्र भक्त घोषित करने के पीछे उनकी मंशा क्या
है इसे गहराई से समझने की जरुरत है.
मंगलवार, 4 जून 2013
छत्तीसगढ़ की अनाज भण्डारण क्षमता में अप्रत्याशित वृद्धि
छत्तीसगढ़ की अनाज भण्डारण क्षमता लगभग 12 लाख मीटरिक टन तक पहुंची : साढ़े नौ साल में बने 245 करोड़ के 364 नये गोदाम
भण्डारण शुल्क में सामान्य किसानों को 20 प्रतिशत और अनुसूचित जाति-जनजाति के किसानों को 30 प्रतिशत की विशेष छूट
अनाज भण्डारण के लिए अग्रिम आरक्षण की भी सुविधा
अनाज भण्डारण के लिए अग्रिम आरक्षण की भी सुविधा
कृषि उपजों के सुरक्षित भण्डार के लिए
छत्तीसगढ़ के किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से भण्डारण की सुविधा देने राज्य
शासन द्वारा बड़े पैमाने पर गोदामों का निर्माण करवाया जा रहा है। प्रदेश
सरकार की एजेंसी के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य भण्डार गृह निगम द्वारा विगत
वर्ष 2004 से वर्तमान वर्ष 2013 में अब तक लगभग साढे़ नौ साल में 245 करोड़
रूपए की लागत से 364 गोदामों का निर्माण किया गया है, जिनकी भण्डारण क्षमता
लगभग सात लाख मीटरिक टन है। इन्हें मिलाकर भण्डार गृह निगम के गोदामों की
संख्या बढ़कर 779 और उनकी कुल भण्डारण क्षमता बढ़कर ग्यारह लाख 82 हजार 712
मीटरिक टन तक पहुंच गयी है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दिशा-निर्देशों के
अनुरूप निगम द्वारा गोदाम निर्माण का कार्य एक अभियान के रूप में चलाया जा
रहा है।
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| छत्तीसगढ़ वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष अशोक बजाज |
निगम
अध्यक्ष श्री अशोक बजाज ने आज यहां बताया कि वर्तमान 779 गोदामों में से
348 गोदामों का निर्माण उनके वर्तमान कार्यकाल के विगत ढाई वर्ष में यानी
दिसम्बर 2010 से अब तक की अवधि में किया गया है, जिनकी कुल भण्डारण क्षमता
लगभग पांच लाख मीटरिक टन है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ भण्डार गृह निगम
की स्थापना दो मई 2002 को हुई थी। किसानों के साथ-साथ व्यापारियों,
संस्थाओं और अन्य जमाकर्ताओं को अनाज के सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से
भण्डारण की सुविधा देना निगम का उददेश्य है। इसमें किसानों को सर्वोच्च
प्राथमिकता दी जा रही है। सामान्य किसानों को उनके जमा किए जाने वाले स्टाक
पर भण्डारण शुल्क में बीस प्रतिशत की छूट का प्रावधान किया गया है, जबकि
अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसानों को तीस प्रतिशत छूट पर भण्डारण
सुविधा दी जा रही है। किसान अगर अपना माल निगम के गोदामों में जमा करने के
लिए अग्रिम आरक्षण चाहते हों, तो उन्हें इसकी सुविधा भी निगम की ओर से मिल
सकती है। किसान अगर चार माह का अग्रिम भण्डारण शुल्क जमा कर दें, तो उन्हें
भण्डारण शुल्क में पांच प्रतिशत की विशेष छूट मिलेगी। गोदामों से पांच
किलोमीटर की परिधि में रहने वाले किसानों और अन्य लोगों को जो, वहां
भण्डारण करवाना चाहते हैं, उन्हें उनके कृषि उपजों की सुरक्षा के लिए कीट
उपचार सुविधा भी नाम मात्र के शुल्क पर दी जा रही है।
श्री बजाज ने बताया कि निगम द्वारा 68 करोड़ 35 लाख रूपए की लागत से निर्मित 145 नये गोदामों के लोकार्पण का कार्यक्रम भी विकास यात्रा के दौरान बनाया गया था। इन गोदामों की भण्डारण क्षमता दो लाख 31 हजार 800 मीटरिक टन है। इनमें से लगभग 59 गोदामों का लोकार्पण पिछले महीने की छह तारीख से 25 तारीख के बीच विकास यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के हाथों सम्पन्न हो चुका है। लोकार्पित गोदामों में धरसींवा, खरोरा, महासमुंद, बसना, सरायपाली, बागबाहरा, पिथौरा, धमतरी, सिहावा, कुरूद, डौंडी, गुण्डरदेही, कवर्धा, पंडरिया, केशलूर, कोण्डागांव, दंतेवाड़ा, गीदम, कोन्टा, कांकेर, चारामा और पखांजूर क्षेत्र के किसानों को अनाज भण्डारण की अच्छी सुविधा मिलेगी। इनके अलावा भैरमगढ़, जांजगीर, अकलतरा, सक्ती, बाराद्वार, चाम्पा, कोरबा, कटघोरा, पाली, लोहरसिंग, घरघोड़ा, बरमकेला, लैलूंगा, सारंगढ़, खरसिया, कुसमी, विश्रामपुर, सूरजपुर, कुनकुरी, बगीचा, पत्थलगांव, फरसाबहार, बैकुंठपुर और जनकपुर में भी नये गोदामों का निर्माण किया जा चुका है। विगत 25 मई को दरभा क्षेत्र में नक्सल हिंसा के कारण अनेक वरिष्ठ नेताओं, नागरिकों और पुलिस जवानों की शहादत की दुखद घटना के कारण विकास यात्रा स्थगित कर दी गयी थी। इस वजह से इनका लोकार्पण नहीं हो पाया। विकास यात्रा में भण्डार गृह निगम द्वारा मुख्यमंत्री के हाथों लगभग एक लाख 46 हजार मीटरिक टन भण्डारण क्षमता के 77 नये गोदामों के निर्माण के लिए भूमिपूजन का भी कार्यक्रम था। श्री बजाज ने बताया कि इनमें से 44 गोदामों का भूमिपूजन महासमुंद धमतरी, बालोद, भिलाई्र-तीन, केशकाल और चारामा के कार्यक्रमों सम्पन्न हुआ। भण्डार गृह निगम के पांच क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, अम्बिकापुर और दुर्ग में संचालित किए जा रहे हैं।
क्रमांक-878/स्वराज्य,रायपुर, 04 जून 2013श्री बजाज ने बताया कि निगम द्वारा 68 करोड़ 35 लाख रूपए की लागत से निर्मित 145 नये गोदामों के लोकार्पण का कार्यक्रम भी विकास यात्रा के दौरान बनाया गया था। इन गोदामों की भण्डारण क्षमता दो लाख 31 हजार 800 मीटरिक टन है। इनमें से लगभग 59 गोदामों का लोकार्पण पिछले महीने की छह तारीख से 25 तारीख के बीच विकास यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के हाथों सम्पन्न हो चुका है। लोकार्पित गोदामों में धरसींवा, खरोरा, महासमुंद, बसना, सरायपाली, बागबाहरा, पिथौरा, धमतरी, सिहावा, कुरूद, डौंडी, गुण्डरदेही, कवर्धा, पंडरिया, केशलूर, कोण्डागांव, दंतेवाड़ा, गीदम, कोन्टा, कांकेर, चारामा और पखांजूर क्षेत्र के किसानों को अनाज भण्डारण की अच्छी सुविधा मिलेगी। इनके अलावा भैरमगढ़, जांजगीर, अकलतरा, सक्ती, बाराद्वार, चाम्पा, कोरबा, कटघोरा, पाली, लोहरसिंग, घरघोड़ा, बरमकेला, लैलूंगा, सारंगढ़, खरसिया, कुसमी, विश्रामपुर, सूरजपुर, कुनकुरी, बगीचा, पत्थलगांव, फरसाबहार, बैकुंठपुर और जनकपुर में भी नये गोदामों का निर्माण किया जा चुका है। विगत 25 मई को दरभा क्षेत्र में नक्सल हिंसा के कारण अनेक वरिष्ठ नेताओं, नागरिकों और पुलिस जवानों की शहादत की दुखद घटना के कारण विकास यात्रा स्थगित कर दी गयी थी। इस वजह से इनका लोकार्पण नहीं हो पाया। विकास यात्रा में भण्डार गृह निगम द्वारा मुख्यमंत्री के हाथों लगभग एक लाख 46 हजार मीटरिक टन भण्डारण क्षमता के 77 नये गोदामों के निर्माण के लिए भूमिपूजन का भी कार्यक्रम था। श्री बजाज ने बताया कि इनमें से 44 गोदामों का भूमिपूजन महासमुंद धमतरी, बालोद, भिलाई्र-तीन, केशकाल और चारामा के कार्यक्रमों सम्पन्न हुआ। भण्डार गृह निगम के पांच क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, अम्बिकापुर और दुर्ग में संचालित किए जा रहे हैं।
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