नशा हे ख़राब : झन पीहू शराब


"न्यूज ब्लॉग में आपका स्वागत है" ..... जल है तो कल है "....." नशा हे ख़राब : झन पीहू शराब " ..... - अशोक बजाज
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सोमवार, 18 जुलाई 2011

मुख्यमंत्री को किसानों ने धान से तौलकर सम्मानित किया


रायपुर, 18 जुलाई 2011
1792-180711
       मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को आज रायपुर जिले में स्थित राज्य के प्रसिध्द तीर्थ चम्पारण्य प्रवास के दौरान किसानों ने धान से तौल कर सम्मानित किया। ग्रामीण सेवा सहकारी समिति चम्पारण्य के किसानों ने मुख्यमंत्री को वर्ष 2010-11 में छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक चावल उत्पादन के लिए केन्द्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से प्राप्त राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। चम्पारण्य के किसान सर्वश्री बलिराम निषाद, चैतूराम यादव, विष्णु साहू, वीरेन्द्र साहू और शोभिन्द साहू सहित अनेक किसानों ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तव में यह राष्ट्रीय पुरस्कार छत्तीसगढ़ के हमारे लाखों मेहनतकश किसानों के कठोर परिश्रम को प्राप्त सम्मान है। यह पुरस्कार राज्य के सभी किसानों को समर्पित है। इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू, राज्य भण्डार गृह निगम अध्यक्ष श्री अशोक बजाज तथा सर्वश्री जगत प्रकाश नड्डा, रामप्रताप सिंह और रामसेवक पैकरा समेत अनेक वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री को नई दिल्ली में केन्द्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा इस महीने की सोलह तारीख को आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के हाथों छत्तीसगढ़ के यह राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया था। DPR
क्रमांक-1792/स्वराज्य

रविवार, 26 जून 2011

चंपारण के भजन - 2

   

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चंपारण के भजन - 1


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शुक्रवार, 24 जून 2011

चंपारण के कर्मयोगी




कर्मयोगी श्री कृष्णदा
कर्मयोगी श्री कृष्णदास अढ़ीआ जी इन दिनों काफी अस्वस्थ है ,वे  बिस्तर से उठ नहीं पाते . पिछले दिनों जब मै उनसे मिलने चंपारण   गया तो वे अपने कक्ष में बिस्तर में लेटे हुए थे . उनकी उम्र 85 वर्ष की हो गई है ,वे महाप्रभु वल्लभाचार्य मंदिर ट्रस्ट चम्‍पारण के मुख्य ट्रस्टी है . महाप्रभु वल्लभाचार्य जी के प्राकट्य स्थल स्थित मंदिर एवं मंदिर परिसर को सजाने - संवारने एवं भव्यता प्रदान करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है . बचपन में हम लोग अक्सर चंपारण (पुराना नाम चांपाझर )  जाया करते थे , यह मेरे गाँव से मात्र 10-12  कि.मी. की दूरी पर है . तब वहां खँडहरनुमा मंदिर हुआ करता था . श्री चंपेश्वर महादेव का मंदिर एवं श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य का  मंदिर पासपास  है . मंदिर के चारों और  सुन्दर अभ्यारण्य है जहाँ अनेकों प्रकार के पुराने  वृक्ष है .
आशीर्वाद देते हुए

 श्री अढ़ीआ जी मूलतः मुंबई के निवासी है वे यहाँ कब आये मुझे स्मरण नहीं लेकिन जब से वे आये है लगातार मंदिर के सौन्दर्यीकरण में लगे है . उनकी वर्षों की तपस्या और लगन का ही परिणाम है कि चम्‍पारण की ख्याति आज पूरे विश्व में हो गई है . यहाँ की भव्यता और सौन्दर्य के सभी कायल है . श्री अढ़ीया जी की कार्यशैली को मैंने काफी करीब से देखा है .बीमार होने के पहले तक  वे चार-चार बजे पहट तक जागते थे और  ट्रस्ट का हिसाब -किताब एवं लिखा-पढ़ी का काम स्वयं करते थे . वे प्रतिदिन 18 से 20 घंटे तक काम करते थे . अभी जब मै उनसे मिला तब भी उनके बिस्तर में ट्रस्ट के हिसाब से संबंधित दस्तावेज एवं कुछ धार्मिक किताबें रखीं थीं . बिस्तर से उठ पाना मुश्किल है लेकिन काम करने की ललक उनमें आज भी है .मेरे टोकने पर उन्होंने अपनी जिन्दादिली आवाज में ही मुझे जवाब दिया कि यह काम मै नहीं छोड़ सकता . इस उम्र में भी उनकी आवाज में कोई फर्क नहीं पड़ा है . उनके आवाज में आज भी वही ओज है जो 10 साल पहले थी . वे   प्रवचन  तो करते ही थे साथ ही साथ गीत व  भजन भी सुनाते थे , उन्हें हारमोनियम बजाते व गाते भी देखा गया है .

हारमोनियम बजाते हुए श्री अढ़ीआ जी
श्री अढ़ीआ जी पिछले एक वर्ष से कुछ ज्यादा ही अस्वस्थ है , कुछ महीने तक वे मुंबई के एक  अस्पताल में भी भरती थे . थोडा सा आराम मिला तो वापस आ गए , मुझे बताया गया कि वे अब उपचार के लिए किसी अस्पताल में नहीं जाना चाहते . वे चंपारण्य में ही रहना चाहते है . माखन उनकी सेवा में सदा लगे रहता है , वह  गाँव का ही निवासी है तथा जब से अढ़ीया जी यहाँ आये है तब से साये की तरह उनके साथ रहता है . इस प्रवास  में मुझे  उनका  पुत्र श्री कमल भाई  नहीं मिला , मैंने पूछा तो उन्होंने बताया कि वह इन दिनों मुंबई गया हुआ है उसका वहां बहुत बड़ा व्यवसाय है . 

प्राकट्य स्थल
श्री अढ़ीआ जी ने मंदिर परिसर, धर्मशाला एवं उसके कमरों का नाम भगवान श्री कृष्ण से जुड़े तथ्यों के आधार   पर किया है.मसलन सुदामापुरी,गोकूल, मथुरा,वृन्दावन,द्वारिका आदि  आदि  .वल्लभ कुल परिवार के मुख्य बैठक जी के गादीपति आचार्य बृजजीवनलाल महाराज एवं उनके ज्येष्ठ लाल युवा आचार्य द्वारिकेश लाल  जी के वे काफी विश्वासपात्र माने जाते है .

अभनपुर विकासखंड के अंतर्गत " चंपारण " छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से मात्र 50 कि.मी. दूर स्थित है , यह प्रदेश की जीवनदायिनी चित्रोत्पला गंगा यानी   महानदी  के किनारे है ." चंपारण  " से 15-20 कि.मी. की दुरी पर  अभनपुर, नवापारा-राजिम एवं आरंग  शहर  है  , जो अलग अलग दिशाओं में है .  यह बहुत ही पवित्र व रमणीय स्थल है . इसे सजाने-संवारने वाले कल्पनाशील कर्मयोगी श्री कृष्णदास अढ़ीआ जी को शत-शत नमन करते हुए ईश्वर से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ. 

ચંપારણ્ય ધામ છત્તીસગઢ રાજ્યમાં રાયપુર જિલ્લામાં આવેલું છે. રાયપુરથી તે ૪૫ કિ.મી.ના અંતરે છે. રાયપુર સ્ટેશનથી ચંપારણ્ય જવા માટે એસ.ટી. બસ શહેરના બસ સ્ટેન્ડથી મળે છે તેમજ પ્રાઇવેટ બસ, જીપ, ટેક્સી વગેરે વાહનો પણ મળે છે.

जय श्री कृष्ण ! 

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