मंगलवार, 3 दिसंबर 2013

मनमीत जो घाव लगाये, उसे कौन मिटाये

                        

                         त्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए दो चरणों में मतदान हो चूका है. पहले चरण में बस्तर संभाग के 12 क्षेत्रों एवं राजनांदगांव जिले के 6 क्षेत्रों कुल 18 सीटों के लिए 11 नवंबर को तथा शेष 72 क्षेत्रों के लिए 19 नवंबर को मतदान हुआ है. मतगणना 8 दिसंबर को होगी, मतदान और मतगणना के बीच लंबा अंतराल है. अतः परिणाम आने में अभी वक्त है. यही वजह है कि इन दिनों घात - प्रतिघात, भीतरघात - खुलाघात जैसी बातें सुर्खियाँ बन रही है. आश्चर्य की बात तो यह है कि कांग्रेस के नेता इन तमाम परिस्थितियों के बाद भी सत्ता में वापसी का सपना देख रहें है , मुख्यमंत्री कौन होगा ? विधायक दल के अन्दर का होगा अथवा बाहर का होगा ? रायपुर में तय होगा कि दिल्ली में तय होगा आदि आदि . यानी सूत न कपास जुलाहों में लट्ठा-लट्ठी. 

                        खैर भीतरघात हो या खुलाघात ये बहुत बुरी चीज है. विधानसभा, लोकसभा ही नहीं पंचायतों एवं नगरीय निकायों के चुनाव में भी यह बीमारी घुस गई है. मै स्वयं 1998 के विधान सभा चुनाव में खुलाघात और भीतरघात का स्वाद चख चुका हूँ , तब मैंने भारतीय जनता पार्टी की टिकिट पर अभनपुर विधानसभा से चुनाव लड़ा था और बागी उम्मीदवार तथा भीतरघात के चलते लगभग 7000 मतों से हार गया था लेकिन 15 वर्षों से मैंने इसका जिक्र तक नहीं किया. मैंने सभी भीतरघातियों को धीरे- धीरे मुख्यधारा में लाकर उन्हें प्रायश्चित करने का अवसर दिया. आवश्यकता पड़ने पर उनकी मदद भी की. यह अलग बात है कि उस आघात का दुष्परिणाम मै आज तक भुगत रहा हूँ ---  

हमसे मत पूछो कैसे, मंदिर टूटा सपनों का, 
लोगों की बात नहीं है, ये किस्सा है अपनों का,
कोई दुश्मन ठेस लगाये, तो मीत जिया बहलाये,
मनमीत जो घाव लगाये, उसे कौन मिटाये.
चिंगारी कोई भड़के, तो सावन उसे बुझाये
सावन जो अगन लगाये, उसे कौन बुझाये,

रविवार, 28 जुलाई 2013

"कश्मीर का सच" कितना सच और कितना झूठ


एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल द्वारा दिखाया जा रहा "कश्मीर का सच" पता नहीं यह कितना सच और कितना झूठ है ? उस पीढ़ी के लोग तो अब रहे नहीं जो इस तथाकथित "सच" की समीक्षा करते, पर इतिहास तो यही कहता है कि जम्मू-कश्मीर का भविष्य पंडित नेहरू, लार्ड माउंटबेटन और शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की दोस्ती की भेंट चढ़ गया. अगर सरदार पटेल को पूरी छूट मिली होती तो कश्मीर समस्या उसी समय समाप्त हो चुकी होती , लेकिन पंडित नेहरू का अब्दुल्ला प्रेम इसमें आड़े आ गया. इस न्यूज चैनल ने कश्मीर रियासत को भारत में विलय में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के तत्कालीन सरसंघचालक श्री माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर जी की भूमिका का अपने रपट में कहीं उल्लेख ही नहीं किया जबकि उन्होंने ही कश्मीर के भारत में विलय में मुख्य भूमिका अदा की थी. उक्त रपट में केवल पंडित नेहरू को ही महिमा मंडित करने का प्रयास किया गया. रपट में यह जानकारी भी छुपाई गई कि जब भारतीय सेना ने कश्मीर के दो तिहाई हिस्से से पाकिस्तानी समर्थकों को खदेड़ दिया था तो पं. नेहरू ने सीज फायर की घोषणा कर भारतीय सेना को वापस लौटने का आदेश किसके इशारे पर दिया तथा  पं. नेहरू ने किसके इशारे पर कश्मीर में धारा 370 लगाई ? बहरहाल पूरे रपट में लार्ड माउंटबेटन को भारत का महान राष्ट्र भक्त घोषित करने के पीछे उनकी मंशा क्या है इसे गहराई से समझने की जरुरत है.

मंगलवार, 4 जून 2013

छत्तीसगढ़ की अनाज भण्डारण क्षमता में अप्रत्याशित वृद्धि

छत्तीसगढ़ की अनाज भण्डारण क्षमता लगभग 12 लाख मीटरिक टन तक पहुंची : साढ़े नौ साल में बने 245 करोड़ के 364 नये गोदाम
 
 भण्डारण शुल्क में सामान्य किसानों को 20 प्रतिशत और अनुसूचित जाति-जनजाति के किसानों को 30 प्रतिशत की विशेष छूट
अनाज भण्डारण के लिए अग्रिम आरक्षण की भी सुविधा
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क

                       कृषि उपजों के सुरक्षित भण्डार के लिए छत्तीसगढ़ के किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से भण्डारण की सुविधा देने राज्य शासन द्वारा बड़े पैमाने पर गोदामों का निर्माण करवाया जा रहा है। प्रदेश सरकार की एजेंसी के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य भण्डार गृह निगम द्वारा विगत वर्ष 2004 से वर्तमान वर्ष 2013 में अब तक लगभग साढे़ नौ साल में 245 करोड़ रूपए की लागत से 364 गोदामों का निर्माण किया गया है, जिनकी भण्डारण क्षमता लगभग सात लाख मीटरिक टन है। इन्हें मिलाकर भण्डार गृह निगम के गोदामों की संख्या बढ़कर 779 और उनकी कुल भण्डारण क्षमता बढ़कर ग्यारह लाख 82 हजार 712 मीटरिक टन तक पहुंच गयी है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दिशा-निर्देशों के अनुरूप निगम द्वारा गोदाम निर्माण का कार्य एक अभियान के रूप में चलाया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष अशोक बजाज 
                              निगम अध्यक्ष श्री अशोक बजाज ने आज यहां बताया कि वर्तमान 779 गोदामों में से 348 गोदामों का निर्माण उनके वर्तमान कार्यकाल के विगत ढाई वर्ष में यानी दिसम्बर 2010 से अब तक की अवधि में किया गया है, जिनकी कुल भण्डारण क्षमता लगभग पांच लाख मीटरिक टन है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ भण्डार गृह निगम की स्थापना दो मई 2002 को हुई थी। किसानों के साथ-साथ व्यापारियों, संस्थाओं और अन्य जमाकर्ताओं को अनाज के सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से भण्डारण की सुविधा देना निगम का उददेश्य है। इसमें किसानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। सामान्य किसानों को उनके जमा किए जाने वाले स्टाक पर भण्डारण शुल्क में बीस प्रतिशत की छूट का प्रावधान किया गया है, जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसानों को तीस प्रतिशत छूट पर भण्डारण सुविधा दी जा रही है। किसान अगर अपना माल निगम के गोदामों में जमा करने के लिए अग्रिम आरक्षण चाहते हों, तो उन्हें इसकी सुविधा भी निगम की ओर से मिल सकती है। किसान अगर चार माह का अग्रिम भण्डारण शुल्क जमा कर दें, तो उन्हें भण्डारण शुल्क में पांच प्रतिशत की विशेष छूट मिलेगी। गोदामों से पांच किलोमीटर की परिधि में रहने वाले किसानों और अन्य लोगों को जो, वहां भण्डारण करवाना चाहते हैं, उन्हें उनके कृषि उपजों की सुरक्षा के लिए कीट उपचार सुविधा भी नाम मात्र के शुल्क पर दी जा रही है।
                               श्री बजाज ने बताया कि निगम द्वारा 68 करोड़ 35 लाख रूपए की लागत से निर्मित 145 नये गोदामों के लोकार्पण का कार्यक्रम भी विकास यात्रा के दौरान बनाया गया था। इन गोदामों की भण्डारण क्षमता दो लाख 31 हजार 800 मीटरिक टन है। इनमें से लगभग 59 गोदामों का लोकार्पण पिछले महीने की छह तारीख से 25 तारीख के बीच विकास यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के हाथों सम्पन्न हो चुका है। लोकार्पित गोदामों में धरसींवा, खरोरा, महासमुंद, बसना, सरायपाली, बागबाहरा, पिथौरा, धमतरी, सिहावा, कुरूद, डौंडी, गुण्डरदेही, कवर्धा, पंडरिया, केशलूर, कोण्डागांव, दंतेवाड़ा, गीदम, कोन्टा, कांकेर, चारामा और पखांजूर क्षेत्र के किसानों को अनाज भण्डारण की अच्छी सुविधा मिलेगी। इनके अलावा भैरमगढ़, जांजगीर, अकलतरा, सक्ती, बाराद्वार, चाम्पा, कोरबा, कटघोरा, पाली, लोहरसिंग, घरघोड़ा, बरमकेला, लैलूंगा, सारंगढ़, खरसिया, कुसमी, विश्रामपुर, सूरजपुर, कुनकुरी, बगीचा, पत्थलगांव, फरसाबहार, बैकुंठपुर और जनकपुर में भी नये गोदामों का निर्माण किया जा चुका है। विगत 25 मई को दरभा क्षेत्र में नक्सल हिंसा के कारण अनेक वरिष्ठ नेताओं, नागरिकों और पुलिस जवानों की शहादत की दुखद घटना के कारण विकास यात्रा स्थगित कर दी गयी थी। इस वजह से इनका लोकार्पण नहीं हो पाया। विकास यात्रा में भण्डार गृह निगम द्वारा मुख्यमंत्री के हाथों लगभग एक लाख 46 हजार मीटरिक टन भण्डारण क्षमता के 77 नये गोदामों के निर्माण के लिए भूमिपूजन का भी कार्यक्रम था। श्री बजाज ने बताया कि इनमें से 44 गोदामों का भूमिपूजन महासमुंद धमतरी, बालोद, भिलाई्र-तीन, केशकाल और चारामा के कार्यक्रमों  सम्पन्न हुआ। भण्डार गृह निगम के पांच क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, अम्बिकापुर और दुर्ग में संचालित किए जा रहे हैं।
 क्रमांक-878/स्वराज्य,रायपुर, 04 जून 2013

शनिवार, 26 जनवरी 2013

गणतंत्र दिवस 2013 के कार्यक्रमों की झलकियाँ

प्रस्तुत है गणतंत्र दिवस 2013 के कार्यक्रमों की झलकियाँ -  
गणतंत्र दिवस 2013 : चौपाल में ध्वजारोहण.

गणतंत्र दिवस 2013 : राज्य भंडारगृह निगम के प्रांतीय मुख्यालय में ध्वजारोहण.
गणतंत्र दिवस 2013 : राज्य भंडारगृह निगम के प्रांतीय मुख्यालय में ध्वजारोहण.

गणतंत्र दिवस 2013 : सरस्वती शिशु मंदिर अभनपुर में बालमित्र पत्रिका का विमोचन.

गणतंत्र दिवस 2013 : सरस्वती शिशु मंदिर अभनपुर में ध्वजारोहण.

गणतंत्र दिवस 2013 :शा.कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला अभनपुर.

गणतंत्र दिवस 2013 :शा. बजरंग दास उच्चतर माध्यमिक शाला अभनपुर में ध्वजारोहण.

गणतंत्र दिवस 2013 : श्री बजरंग दास शा. उच्चतर माध्यमिक शाला अभनपुर में गणतंत्र दिवस समारोह.

गणतंत्र दिवस 2013 : अभनपुर के मुख्य संयुक्त समारोह में ध्वजारोहण.
गणतंत्र दिवस 2013 : नगर पंचायत अभनपुर के तत्वाधान में मुख्य समारोह में परेड की सलामी.
गणतंत्र दिवस 2013 : नगर पंचायत अभनपुर द्वारा आयोजित नगर स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में स्कूली बच्चों की रंगारंग प्रस्तुति.
गणतंत्र दिवस 2013 : नगर पंचायत अभनपुर द्वारा आयोजित नगर स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह .


                गणतंत्र दिवस की आप सबको हार्दिक शुभकामनाएं !