गुरुवार, 29 सितंबर 2011

हर कीमत पर करूंगा संविधान की रक्षा : डॉ. रमन सिंह

  

मुख्यमंत्री के महत्वपूर्ण विचारों पर केन्द्रित पुस्तक का विमोचन

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि संगठन और आम जनता के सहयोग और समर्थन से निर्वाचित होकर मैने जिस भारतीय संविधान की रक्षा की शपथ ली है, उसे हर कीमत पर और हर हालत में हमेशा निभाता रहूंगा। उन्होंने कहा कि देश के संविधान के खिलाफ काम करने वाली ताकतों से मै कभी हाथ नहीं मिला सकता। डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि नक्सल मुद्दे पर वर्ष 2003 से आज तक मै और मेरी सरकार हमेशा कायम है और आगे भी नक्सल हिंसा के खिलाफ राज्य सरकार की नीतियों में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर और राज्य में गांव, गरीब तथा किसानों सहित समाज के सभी कमजोर वर्गो की बेहतरी के लिए जनभावनाओं पर आधारित छत्तीसगढ़ सरकार की नीतियों में आगे भी कोई परिवर्तन नहीं होगा।
        मुख्यमंत्री ने आज रात यहां आयोजित समारोह में इस आशय के विचार व्यक्त किए। उन्होंने समारोह में श्री सुरेश तिवारी द्वारा संकलित और सम्पादित पुस्तक का विमोचन किया जिसमें श्री तिवारी ने डॉ. रमन सिंह के विगत सात वर्षो के कार्यकाल के विभिन्न प्रसंगों, विभिन्न अवसरों और विभिन्न कार्यक्रमों में व्यक्त उनके महत्वपूर्ण विचारों को संग्रहित कर पुस्तक स्वरूप में प्रस्तुत किया है। पुस्तक में श्री तिवारी द्वारा समय-समय पर मुख्यमंत्री से लिए गए कुछ प्रमुख साक्षात्कार भी शामिल किए गए हैं। मुख्यमंत्री के कार्यकाल की विभिन्न उपलब्धियों के बारे में प्रबुध्दजनों द्वारा व्यक्त विचारों और लिखे गए आलेखों का समावेश भी श्री तिवारी ने पुस्तक में किया है। डॉ. रमन सिंह ने समारोह में कहा कि वास्तव में किसी भी निर्वाचित मुख्यमंत्री को सरकार की नीतियां बनाते समय मात्र पांच वर्ष के कार्यकाल को नहीं बल्कि राज्य के हित में जनता की अगले कई दशकों तक की जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। भले ही वह उतने लम्बे समय तक मुख्यमंत्री रहे या न रहे, लेकिन उसकी बनाई नीतियों का दूरगामी फायदा राज्य को मिलना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि श्री तिवारी के आग्रह पर मै हालाकि इस पुस्तक का विमोचन कर रहा हू, लेकिन स्वयं के बारे में प्रकाशित इस किताब का विमोचन करते हुए मै खुद को काफी असहज महसूस कर रहा हॅ। डॉ. रमन सिंह ने विनम्रता पूर्वक कहा कि मुझे लगता है कि मैने अब तक ऐसा कुछ भी नहीं किया है जिस पर कोई किताब लिखे या प्रकाशित करे। संगठन ने और छत्तीसगढ़ की जनता ने मुझे सेवा का और राज्य के विकास के लिए काम करने का अवसर दिया है, जिसके हर एक पल का बेहतर इस्तेमाल कर सकूॅ यह मेरी कोशिश रहती है। जनता की ताकत के बल पर ही कई चुनौती पूर्ण निर्णय भी मुझे लेने पड़े जैसे गरीबों के लिए सस्ते चावल और नि:शुल्क नमक की योजना। डॉ. सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी जल सम्पदा, वन सम्पदा और खनिज सम्पदा की दृष्टि से काफी धनवान है। राज्य सरकार महानदी के पानी का उपयोग सिंचाई, मछली पालन, निस्तारी और पेयजल सुविधा तथा    औद्योगिक प्रयोजन के लिए करना चाहती है इसके लिए हम महानदी पर बिना किसी सरकारी खर्च के, दो हजार करोड़ रूपए की लागत से बहुत जल्द चार विशाल बैराजों का निर्माण करेंगे। इनसे छत्तीसगढ़ को अगले 50 वर्षों तक काफी राजस्व मिलेगा। कुछ लोगों को यह गलत फहमी थी कि सरकार महानदी में बैराज बनवाकर उसके पानी को बेचना चाहती है, जबकि ऐसी कोई बात नहीं है। डॉ. सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के नाते मेरी हमेशा यह कोशिश रही है कि राज्य के हितों का हमेशा संरक्षण हो। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ के लौह अयस्क का इस्तेमाल छत्तीसगढ़ में ही इस्पात बनाने में हो इसके लिए राज्य सरकार ने पहल करते हुए केन्द्र को समझाया कि यहां के लौह अयस्क का यहीं पर वेल्यूएडिशन हो। इसके बिना लौह अयस्क का देश से बाहर निर्यात करना राष्ट्रीय अपराध माना जाएगा। प्रधानमंत्री सहित केन्द्र के लोगों को भी यह बात माननी पड़ी। आज बस्तर में एन.एम.डी.सी. के स्टील प्लांट की परियोजना बहुत जल्द साकार होने जा रही है। समारोह में मुख्यमंत्री के संसदीय सलाहकार श्री अशोक चतुर्वेदी, छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक श्री रमेश नैय्यर, राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष श्री श्याम बैस और पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एस.के.पाण्डेय ने भी अपने विचार व्यक्त किए। आभार प्रदर्शन छत्तीसगढ़ राज्य भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज ने किया। श्री अशोक चतुर्वेदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश की सामाजिक-आर्थिक प्रयोगशाला है, जो कुछ भी यहां घटित होता है, पूरे देश में उसका असर होता है। जनता ने और इतिहास ने डॉ. रमन सिंह को प्रदेश के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री के रूप में राज्य के विकास की कमान सौंपी है, वे छत्तीसगढ़ के एक ऐसे स्वप्न दृष्टा हैं जो आज राज्य की बेहतरी के लिए अपने सपनों को धरातल पर साकार होते देख रहे हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ की क्षमताओं को बखूबी पहचान कर इसके विकास को एक नई ऊर्जा और गति प्रदान की है। 
   अपने आधार वक्तव्य में श्री रमेश नैय्यर ने कहा कि डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में गरीबों और समाज के जरूरतमंद तबको के विकास के लिए जो कुछ भी किया गया और इस दौरान प्रदेश ने जो कुछ भी किया, वह आज पूरे देश के लिए शोध का विषय बन गया है। श्री नैय्यर ने कहा कि डॉ. रमन सिंह ने राजनीति को जन सेवा का माध्यम बनाया है। छत्तीसगढ़ उनके नेतृत्व में खुशहाली के रास्ते पर चल पढ़ा है। गरीबों को भूख से मुक्ति मिली है। हर खेत को पानी और हर हाथ को काम मिल रहा है। प्रदेशवासियों को आगे भी उनसे कई अपेक्षाएं है। श्री श्याम बैस ने कहा कि डॉ. रमन सिंह अपने विचारों के जरिए राज्य में सुशासन की परिकल्पना को साकार कर रहे हैं। श्री श्याम बैस ने कहा कि श्री सुरेश तिवारी ने पुस्तक में मुख्यमंत्री के विचारों को एक कुशल संग्रहणकर्ता के रूप में बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया है। समारोह में श्री सुरेश तिवारी ने पुस्तक की विषय वस्तु के बारे में बताया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य ब्रेवरेज कार्पोरेशन के अध्यक्ष श्री देवजी भाई पटेल और विधायक श्री राजू सिंह क्षत्री भी उपस्थित थे।

रविवार, 25 सितंबर 2011

देश की आत्‍मा ही उसकी मूल संस्‍कृति है

               
पं. दीनदयाल उपाध्‍याय की जयंती 25 सितम्‍बर पर विशेष लेख 
                                                                                   पं.दीनदयाल उपाध्याय एक महान राष्ट्र चिन्तक एवं एकात्ममानव दर्शन के प्रणेता थे. उन्होनें मानव के शरीर को आधार बना कर राष्ट्र के समग्र विकास की परिकल्पना की. उन्होनें कहा कि मानव के चार प्रत्यय है पहला मानव का शरीर , दूसरा मानव  का मन , तीसरा मानव की बुद्धि और चौथा मानव की आत्मा. ये चारोँ पुष्ट होंगें तभी मानव का समग्र विकास माना जायेगा. इनमें से किसी एक में थोड़ी भी गड़बड़ है तो .....      Read More


 पं. दीनदयाल जयंती के कार्यक्रम की झलकियाँ ----