रविवार, 25 सितंबर 2011

देश की आत्‍मा ही उसकी मूल संस्‍कृति है

               
पं. दीनदयाल उपाध्‍याय की जयंती 25 सितम्‍बर पर विशेष लेख 
                                                                                   पं.दीनदयाल उपाध्याय एक महान राष्ट्र चिन्तक एवं एकात्ममानव दर्शन के प्रणेता थे. उन्होनें मानव के शरीर को आधार बना कर राष्ट्र के समग्र विकास की परिकल्पना की. उन्होनें कहा कि मानव के चार प्रत्यय है पहला मानव का शरीर , दूसरा मानव  का मन , तीसरा मानव की बुद्धि और चौथा मानव की आत्मा. ये चारोँ पुष्ट होंगें तभी मानव का समग्र विकास माना जायेगा. इनमें से किसी एक में थोड़ी भी गड़बड़ है तो .....      Read More


 पं. दीनदयाल जयंती के कार्यक्रम की झलकियाँ ----







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